सत्र संचालन प्रशिक्षक पिछले सत्र के पुनरावलोकन से इस सत्र को आगे बढ़ाएगा। पिछले सत्र में हमने जो सीखा उसे…
सत्र 4 – सब मिले हुए हैं
सत्र संचालन प्रशिक्षक याद दिलाएगा कि पिछले सत्र में हमने जाना कि कैसे एक मूल्य का ह्रास अकेले में नहीं…
सत्र 3 – मैं कौन?
सत्र संचालन सत्र 1 और 2 के आधार पर प्रशिक्षक अब तक सीखे गए का पुनरावलोकन करेगा। इस पुनरावलोकन के…
सत्र 2 – पुरानी यादें
सत्र संचालन प्रशिक्षक इस सत्र की भूमिका को पिछले सत्र से ही उठाते हुए कहेगा कि हम इस बात को…
सत्र 1 – आप कौन?
सत्र संचालन प्रशिक्षक प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की औपचारिक शुरुआत करेगा। सत्र की शुरुआत से पहले प्रशिक्षक प्रतिभागियों…
एक प्रजातंत्र में जन आंदोलनों का स्थान, करिश्माई नेताओं का अंधानुकरण और मात्र राजनीतिक प्रजातंत्र की सीमाएं- भीमराव अंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता भीमराव अंबेडकर ने यह भाषण नवंबर 1949 में नई दिल्ली में दिया था। 300 से ज्यादा…
‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’ – बलराज साहनी
(अभिनेता बलराज साहनी ने यह कालजयी भाषण 1972 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के दीक्षांत समारोह में दिया था।) लगभग…
पहचान की राजनीति और वामपंथ – एरिक हॉब्सबॉम
अनुवाद: अभिषेक श्रीवास्तव मेरा यह व्याख्यान आश्चर्यजनक रूप से एक बिल्कुल नए विषय पर है।* हम लोग ”सामूहिक पहचान”(कलेक्टिव आइडेंटिटी),…
अतीत और आज़ादी के बारे में – जॉर्ज ऑर्वेल, 1984
अनुवाद: अभिषेक श्रीवास्तव हमारी समकालीन सत्ता को कायम रहने के लिए अतीत को बदलना दो वजहों से महत्वपूर्ण है। एक…
युद्ध के बारे में – जॉर्ज ऑर्वेल, 1984
अनुवाद: अभिषेक श्रीवास्तव दुनिया भर के देश निरंतर युद्ध लड़ते रहते हैं। कोई आंतरिक तो कोई बाहरी। ऐसा बीते कई…
